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Tuesday, October 4, 2016

मंदिर जहाँ होती है योनि की पूजा,

ये मंदिर आसम के गोवाहाटी  से 10 किलो मीटर दूर नीलांचल नामक पहाड़ी पर स्थित है आपको जानकर हैरानी होगी लेकिन आपको बतादू की इस मंदिर में लोग यौनि की पूजा करते है अब आप सोच रहे होंगे की भला किसी मंदिर में यौनि की पूजा कैसे हो सकती है लेकिन ये सच है जी हां यहाँ यौनि की ही पूजा होती है इस मंदिर के पीछे बड़ी रोचक कहानी है !

जब सती के पिता ने अपनी पुत्री और उसके पति शंकर को यज्ञ में अपमानित किया था और भगवान् शिव को पूरा भला कहा था इस बात से सती बहुत दुखी हुई हुई और उसी समय यज्ञ की जलती हुई अग्नि में कूद कर अपनी जान दे दी उसके बाद भगवान् शिव को गुस्सा आया और उन्होंने शती के शव को उठा कर तांडव नृत्य किया था  और इस शव को लेकर इधर उधर विचरने लगे तब भगवान विष्णु ने  भगवान शिव का मोह विनाश करने हेतु माँ पराम्बा सती के शरीर के 51 टुकड़े कर दिये और ये सभी दुकड़े अलग अलग जगह पर जाकर गिरे थे  उन्हीं में से गुवाहाटी के पास कामाख्या में माँ की योनि वाला हिस्सा गिरा और वहाँ एक शक्ति पीठ स्थापित हो गया आज तक वहाँ योनि ही स्थित है जिसकी पूजा होती है।इस मंदिर में यौनि के आकर का एक कुंड है जिसमे से जल निकलता रहता है इस कुंड के ऊपर एक लाल कपड़ा होता है जिससे उसको ढक देते है और इसके ऊपर कुछ फूल भी डाल देते है !

इस मंदिर में हर साल एक मेले का आयोजन किया जाता है और इस मेले का नाम है अम्बुबाजी मेला  इस मेले में दूर दूर के तांत्रिक और अघोरी हिस्सा लेते है इस मेले में एक चमत्कार होता है वैसे तो यहाँ यौनि से पानी निकलता रहता है लेकिन मेले के तीन दिन यहाँ इस यौनि से खून निकलता है इस मेले को कामरूप का कुम्भ कहा जाता है यहाँ इस मेले के आलावा और भी कई ऐसे महीने है जिनमे यहाँ पूजा की जाती है !



इस मंदिर में और भी कई ऐसे छोटे छोटे मंदिर है जिनमे महीनों के हिसाब से पूजा की जाती है यहाँ पाँच मंदिर तो भगवान् शिव के हैं और तीन मंदिर भगवान् बिष्णु के हैंा ये मंदिर काफी साल पुराने हैं यहाँ दुर्गा पूजा, अम्बुबाजी पूजा ऐसी कई पूजाए की जाती है जिनमे यहाँ यौनि की पूजा को सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है 

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