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Monday, October 3, 2016

मोतीः - पर्यायबाची तथा मोती के प्रकार

पर्यायबाची- मोती को संस्कृत मे मुक्ता, सोम्या, नीरज, तारका, शशि-रत्न, मौक्तिक, शुक्ति मणि,और बिन्दुफल के नाम से जाना जाता है। हिन्दी भाषा में इसे मोती,मुक्ता के नाम से ही जाना जाता है पंजाबी भाषा में मोती, उर्दू फ़ारसी भाषा में मुखारिद लैटिन भाषा में मार्गारिटा(Margarita) तथा अग्रेंजी भाषा में पर्ल(Pearl) के नाम से जाना जाता है।

मोती कुल नौ प्रकार के बताऐ जाते हैं।

गजमुक्ता
गजमुक्ता

गजमुक्ता- विश्व का सर्वश्रेष्ठ प्रकार का मोती है जो हाथी के मस्तक से प्राप्त होता है, किन्तु यह कहा जाऐ कि सभी हाथियों के मस्तक से यह मोती प्राप्त होता है तो यह बात गलत है यह केवल उन्ही हाथियों के मस्तक से प्राप्त होता है जिनका जन्म पुष्य या श्रवण नक्षत्र में रविवार या सोमवार के दिन सूर्य के उत्तरारण काल मेंहोता है। गजमुक्ता हाथियों के दन्तकोषों तथा कुम्भस्थलों से भी प्राप्त होता है। गजमुक्तक सुडौल, स्निग्ध,एवं तेजयुक्त होता है।

धारण करने का प्रभाव-यह शुभ तिथि में धारण करने पर सभी प्रकार के कष्टों को दूर करके मन की शक्ति प्रदान करता है। इसको छेदना नही चाहिये औऱ न ही इसकी कीमत ही लगानी चाहिये।

सर्पमुक्ता-
सर्पमुक्ता

यह मोती सर्वश्रेष्ठ जाति के सर्प वासुकी के मस्तक पर पाया जाता है जैसे जैसे सर्प की आयु वढ़ती जाती है तैसे तैसे उसके मस्तक का  मोती हरे नीले रंग में ज्यादा तेजयुक्त तथा प्रभावशाली होता जाता है। यह मोती अति भाग्यशाली व्यक्ति को भी दुर्लभता से प्राप्त होता है।

धारण करने का प्रभाव---- इस मोती को शुभ मुहूर्त में धारण करने से सभी प्रकारकी मनोकामनाऐं शीघ्र ही पूरी हो जाती हैं।

वंशमुक्ता

   वंश मुक्तक --- वाँस में पैदा होने वाला यह मोती हर प्रकार के वाँस में नही पाया जाता अपितु उस बाँस में मिलता है  जिस बाँस में से स्वाति नक्षत्र, पुष्य नक्षत्र अथवा श्रवण नक्षत्र से एक दिन पहले ही एक विशेष प्रकार की आवाज निकलने लगती है और उस नक्षत्र की समाप्ति तक वेदध्वनि की तरह की आवाज सुनाई देती रहती है।उस बाँस को बीच में से फाड़कर मोती निकाल लेते हैं । यह मोती आकार में गोल तथा रंग में हल्का हरा होता है।

धारण करने का प्रभाव----- इस मोती को धारण करने से अपार धन सम्पत्ति की प्राप्ति तथा भाग्य का उदय होता है, राज्यपक्ष समाज में भी उच्चपद तथा प्रतिष्ठा प्राप्त होती है।

शंख मुक्ता---- समुद्र से प्राप्त होने वाले विशेष जाति के शंख जिसका कि नाम पांञ्चजन्य है की
मोती शंख 
नाभि से प्राप्त होता है, इसका रंग हल्का नीला होता है जो बहुत ही सुडौल व सुन्दर होता है।इस मोती पर यज्ञोपवीत की तरह की तीन रेखाऐं अकिंत रहती हैं।इस मोती में कोई चमक नही होती है।

धारण करने का प्रभाव----- इस मोती को धारण करने से स्वास्थ्य से संबंधित सभी कष्टों से तो मुक्ति मिलती ही है अपितु यह लक्ष्मीवर्धक तथा सर्वकष्ट निवारण समर्थ होता है।इस मोती को छेदना अर्थात बींधना नही चाहिये।

शूकर मुक्ता

शूकर मुक्तक— यह मोती सुअर के मस्तिष्क में पाया जाता है।यह मोती पीले रंग का गोल ,सुन्दर व चमकदार होता है।

धारण करने का प्रभाव--- इसको धारण करने से स्मरण शक्ति व वाक् शक्ति की वृद्धि होती है तथा इस मोती के धारण करने से जिस स्त्री को केवल कन्या ही होती हैं एसी स्त्री धारण करने के बाद निश्चित ही पुत्र लाभ करती है।

आकाश मुक्तक---- यह विद्युत की भाँति चमकदार एवं गोल होता है।यह पुष्य नक्षत्र की वर्षा में कहीं कहीं एकाध मोती गिरता है।इसे प्राप्त करने से मनुष्य भाग्यशाली तेजस्वी बनता है तथा अपार गुप्त संपत्ति को प्राप्त करता है।

मेघ मुक्तक ---यह मोती मेघों के वर्ण के समान श्यामवर्ण का तथा चमकदार होता है जब रविवार के दिन पुष्य या श्रवण नक्षत्र होने पर वर्षा होती है तब कहीं कहीं एक दो मोती गिर पड़ता है यह मोती सभी प्रकार के अभाव को दूर करता है।

सीप मुक्तक --- सीपी का मोती

मोती चंद्रमा का रत्न है यह समुद्र के अन्दर सीप के शरीर में जलीय वातावरण में पैदा होता है क्योंकि यह जल में रहने वाले जीव के अन्दर पैदा होता है अतः एक प्राणिज रत्न के साथ साथ जलीय रत्न की श्रेणीं में आता है।इसे पैदा करने वाला घोंघा मुसेल जाति का जलीय जीव है इस घोंघे में धागे के समान कुछ अंग होते हैं जिनके द्वारा यह समुद्री चट्टानों से चिपका रहता है घोंघे के शरीर में दो माँस के आवरण होते हैं इन आवरणों से लसलसा पदार्थ निकलता है जो जमकर धीरे धीरे सीपी का रूप धारण कर लेता है।यह एक ही आकृति की दो भागों में होती है और एक ओर से जुड़ी होती है घोंघा इसी के बीच अपने आपको सुरक्षित मानकर रहता है सीपी जहाँ बीच में खुली होती है उसी तरफ से आवश्यकतानुसार खोलकर घोंघा अपना भोजन प्राप्त करता है। प्राचीन मतानुसार स्वाति नक्षत्र की बूँद जब सीप के खुले मुख में समा जाती है तब वह मोती बन जाती है

शुक्ति शंखो गजः क्रोडःफणी मत्स्यश्च दुर्दुरः।

वणरेते सम ख्यातास्तास्तज्जे मौक्तिकयो नमः।।

स्वाति नक्षत्र की वर्षा की बूँद जब सीप के मुँह में गिरती है तो मोती केले के अन्दर गिरने पर कपूर सर्प के मुख में पड़ने पर हलाहल विष हाथी सुअर मेढ़क आदि के मुख में गिरने से मोती बन जाती है बाँस में गिरने से बंशलोचन बन जाती है।

मोती मुख्यतः ऊपर बताऐ गये प्रकारों के होने के बावजूद सीप के मोती के अलावा अन्य सभी प्रकार के मोती अप्राप्य ही होते हैं अतः मुख्यतः मोती सीप से ही प्राप्त होते हैं, जो समुद्र में निकलती है इन्हैं छेदा जा सकता है ये मोती विभिन्न आकार जैसे गोल, लम्बे, बेडोल, सुडौल,तीखे और चपटे में पाये जाते हैं।


श्याम बसरे की खाड़ी से प्राप्त मोती के बारे में कहा जाता है कि वह श्रेष्ठ होता है। बसरे का मोती हल्का पीला पन लिये हुये मटमैला सा होता है।

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