मोती का आयुर्वेदिक उपयोग या चिकित्सा में मोती का प्रयोग - Religion of India

Religion of India

Only Religion Of Humanity Of World.

Breaking

Home Top Ad

Responsive Ads Here

Post Top Ad

Responsive Ads Here

Monday, October 3, 2016

मोती का आयुर्वेदिक उपयोग या चिकित्सा में मोती का प्रयोग

आयुर्वेद में मोतीः


मोती कैल्शियम का उत्पाद होने के कारण कैल्सियम की कमी से होने वाले रोगों में बहुत ही लाभकारी है, इसे केवड़े या गुलाव जल के साथ घोटकर पिष्टी भी बनाई जाती है। मोती की भस्म भी बनाई जाती है। मोती की भस्म इसी नाम से मिलती है तथा पिष्टी को मुक्ता पिष्टी के नाम से जाना जाता है।
मोती शीतल ,मधुर, शान्ति व कान्ति वर्धक, नेत्र ज्योतिवर्धक, अग्नि दीपक, वीर्यवर्धक व विषनाशक है ।यह कफ, पित्त, श्वांस, आदि रोगों मे अति लाभदायक है।यह हृदय को शक्ति देने वाली औषधि है।

मोती औषधि के रुप में हृदय रोग, मानसिक रोग, रक्त चाप, मूर्छा, मिर्गी , उन्माद, मूत्र की जलन, मूत्र मार्ग में रुकावट, पथरी, अर्श या बवासीर की बीमारी, दाँतों के रोगों, मुख रोगों, उदर विकारों,पेट दर्द, वात, दर्द,गठिया, नेत्र रोगों मियादी बुखार, शारीरिक दुर्वलता, व दाह आदि रोगों को नष्ट करने में प्रयोग किया जाता है।

Post Bottom Ad

Responsive Ads Here

Pages